Wednesday, 7 June 2023

Short Storie In Hindi 2023

 Short Storie In Hindi 2023


जब कभी भी short stories in hindi 2023 कहानियों का जिक्र होता है तब बच्चो का भी जिक्र जरुर से किया जाता है, क्यूंकि कहानियाँ मुख्य रूप से बच्चों को ही सबसे ज्यादा पसदं होती है। आज हम दादा-दादी या नाना नानी द्वारा सुनाई जाने वाली ऐसी ही कुछ मज़ेदार Very Short Story In Hindi लेकर आये है, जिससे पढ़ने के बाद आपके बच्चों का सिर्फ मनोरंजन ही नहीं होगा बल्कि उन्हें बहुत कुछ सीखने को भी मिलेगा।




1. बिना विचारे काम मत करो


एक किसान ने एक नेवला पाल रखा था | नेवला बहुत चतुर और स्वामीभगत था | एक दिन किसान कहीं गया था | किसान की स्त्री ने अपने छोटे बच्चे को दूध पिला कर सुला दिया और नेवले को वहीं छोड़ कर वह गड़ा और रस्सी लेकर कुएं पर पानी भरने चली गई |


किसान की स्त्री के चले जाने पर वहां एक काला सांप बिल में से निकल आया | बच्चा पृथ्वी पर कपड़ा बिछाकर सुलाया गया था और सांप बच्चे की ओर ही आ रहा था | नेवले ने यह देखा तो सांप के ऊपर टूट पड़ा और उसने सांप को काटकर टुकड़े-टुकड़े कर डाला और घर के दरवाजे पर किसान की स्त्री का रास्ता देखने गया |


किसान की स्त्री घड़ा भर कर लौटी उसने घर के बाहर दरवाजे पर नेवले को देखा नेवले के मुख्य वक्त लगा देखकर उसने समझा कि इसने मेरे बच्चे को काट डाला है | दुख और क्रोध के मारे भरा घड़ा उसने नेवले पर पटक दिया बेचारा नेवला कुचल कर मर गया |


वह स्त्री दौड़कर घर में आई उसने देखा कि उसका बच्चा सुख से सो रहा है | वहां एक काला सांप कटा पड़ा है | स्त्री को उसकी भूल का पता लग गया वह दौड़ कर फिर नेवले के पास आई और नेवले को गोद में उठा कर रोने लगी लेकिन अब उसने रोने से क्या लाभ ?


इसलिए कहा है – बिना विचारे जो करें, सो पाछे पछताए | काम बिगारे आपनो, जग में होत हंसाय ||





2. दया का फल


बादशाह सुबुतगिन पहले बहुत गरीब था | एक साधारण सैनिक था | एक दिन वह बन्दुक लेकर घोड़े पर बैठकर जंगल में शिकार खेलने गया था | उस दिन उसे बहुत दौड़ना और हैरान होना पड़ा | बहुत दूर जाने पर उसे एक हिरणी अपने छोटे बच्चे के साथ दिखाई पड़ी | सुबुतगिन ने उसके पीछे दौड़ा दौड़ा दिया |


हिरणी डर के मारे भाग कर एक झाड़ी में छिप गई; लेकिन उसका छोटा बच्चा पीछे छूट गया | सुबुतगिन ने हिरण के बच्चे को पकड़ लिया और उसके पैर बांधकर घोड़े पर उसे लाद लिया | बहुत ढूढने ने पर भी जब हिरणी नहीं मिली तो बच्चे को लेकर ही वह लोट पड़ा |


हिरण ने देखा कि उसके बच्चे को शिकारी बांधकर लिए जा रहा है | वह अपने बच्चे के मोह से झाड़ी से निकल आई | और सुबुतगिन के घोड़े के पीछे पीछे दौड़ने लगी बहुत दूर जाकर सुबुतगिन ने पीछे देखा | अपने पीछे हिरणी को दौड़ता देख उसे आश्चर्य हुआ और दया आ गई | उसने उसके बच्चे के पैर खोल कर घोड़े से उतार दिया | हिरणी प्रसन्न होकर अपने बच्चे को लेकर भाग गई |


Hindi Kahani उस दिन घर लौट कर जब रात में सुबुतगिन सोया तो उसने एक स्वप्न देखा | उससे कोई देवदूत कह रहा था – ” सुबुतगिन ! तू ने आज एक गरीब हिरणी पर जो दया की है | परमात्मा ने तेरा नाम बादशाहों की सूची में लिख लिया है | तू एक दिन बादशाह बनेगा” सुबुतगिन का स्वप्न सच्चा था | वह आगे चलकर बादशाह हुआ |


 शिक्षा: “एक हिरणी पर दया करने का जो जीवो पर दया करता है | उस पर भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं ||”






3. पिता और पुत्र


एक जवान बाप अपने छोटे पुत्र को गोद में लिए बैठा था | कहीं से उड़कर एक कौवा उसके सामने खपरैल पर बैठ गया |


पुत्र ने पिता से पूछा – ” यह क्या है ”

पिता – ” कोआ है ”

पुत्र ने फिर पूछा – ” यह क्या है ”

पिता ने फिर कहा – ” यह कोआ है ”

पुत्र बार-बार पूछता था -” क्या है ”

पिता स्नेह से बार-बार कहता था – ” कोआ है ”

कुछ वर्षों में पुत्र बड़ा हुआ और पिता बुड्ढा हो गया | पिता चारपाई पर बैठा था | घर में कोई उसके पुत्र से मिलने आया | पिता ने पूछा – ” कौन आया है |”

पुत्र ने नाम बता दिया थोड़ी देर में कोई और आया | और पिता ने फिर पूछा | इस बार झल्लाकर पुत्र ने कहा – “आप चुपचाप पढ़े क्यों नहीं रहते | आपको कुछ करना धरना तो है नहीं ! कौन आया है कौन गया यह टाय-टाय दिनभर क्यों लगाए रहते हैं |

पिता ने लंबी सांस खींची | हाथ से सिर पकड़ा | बड़े दुख भरे स्वर में धीरे-धीरे वह कहने लगा | मेरे एक बार पूछने पर तुम क्रोध करते हो | और तुम सैकड़ों बार पूछते थे | एक ही बात -” यह क्या है ” ! मैंने कभी तुम्हें झिकड़ा नहीं ! ” मैं बार-बार बताता कोआ है |”

कहानी की शिक्षा: ” अपने माता पिता का तिरस्कार करने वाले ऐसे लड़के बहुत बुरे माने जाते हैं | तुम सदा इस बात का ध्यान रखो कि माता-पिता ने तुम्हारे पालन पोषण में कितना कष्ट उठाया है | और तुमसे कितना प्यार किया है |”




4. ईश्वर सब कहीं है


दातादीन अपने लड़के गोपाल को नित्य शाम को सोने से पहले कहानियां सुनाया करता था | एक दिन उसने गोपाल से कहा -” बेटा ! एक बात कभी मत भूलना कि भगवान सब कहीं है |”

गोपाल ने इधर-उधर देखा पूछा- ” पिताजी ! भगवान सब कहीं हैं, वह मुझे तो कहीं दिखते नहीं |”

दातादीन ने कहा – ” हम भगवान को देख नहीं सकते किंतु | वह सब कहीं हैं | और हमारे सब कामों को देखते रहते हैं |

गोपाल ने पिता की बात याद कर ली | कुछ दिन बाद अकाल पड़ा | दातादीन के खेतों में कुछ हुआ नहीं | एक दिन गोपाल को लेकर रात के अंधेरे में वह गांव से बाहर गया | वह दूसरे किसान के खेत में से चोरी से एक गठा अन्न काटकर घर लाना चाहता था | गोपाल को मेड पर खड़ा करके उसने कहा -” तुम चारों और देखते रहो ! कोई इधरआवे या देखे तो मुझे बता देना |

जैसे ही दातादीन खेत में अन्न काटने बैठा गोपाल ने कहा -” पिताजी ! रुकिए |”

दातादीन ने पूछा – ” क्यों कोई देखता है ! क्या |”

गोपाल ने कहा – “हां ! देखता है |”

दातादीन खेत से निकलकर मेड पर आया | उसने चारों ओर देखा जब कोई कहीं न दिखा तो उसने पुत्र से पूछा – ” कहां ! कौन देखता है |”

गोपाल -” आपने ही तो कहा था कि ईश्वर सब कहीं है और सबके काम देखता है | तब वह आप को खेत काटते क्या नहीं देखेगा | दातादीन पुत्र की बात सुनकर लज्जित हो गया |

चोरी का विचार छोड़कर वह घर लौट आया |






5. मेल की शक्ति


मातादीन के 5 पुत्र थे – शिवराम, शिवदास, शिवलाल, शिवसहाय और शिवपूजन | ये पांचो लड़के परस्पर झगड़ा किया करते थे | छोटी सी बात पर आपस में तू-तू मैं-मैं करने लगते और गुत्थमगुत्थी कर लेते थे |

मातादीन अपने लड़कों के झगड़े से बहुत ऊब गया था | उसने एक दिन उन्हें समझाने के विचार से पास बुलाया | पहले से पतली-पतली सुखी पाच टहनियों का उसने एक छोटा गट्ठर बना लिया था | पुत्रों से उसने कहा – ” तुम में से जो इन कहानियों के गट्ठर को तोड़ देगा, उसे एक रुपए का पुरस्कार मिलेगा |”

पांचो लड़के झगड़ने लगे कि गट्ठर को वो पहले तोड़ेंगे | उन्हें डर था कि यदि दूसरा भाई पहले तोड़ देगा तो रुपया उसी को मिल जाएगा | मातादीन ने कहा – ” पहले छोटे भाई शिवपूजन को तोड़ने दो |”

शिवपूजन ने गट्ठर उठा लिया और जोर लगाने लगा | दांत दबाकर, आंख मीच कर बहुत जोर उसने लगाया | सिर पर पसीना आ गया; किंतु गट्ठर की टहनीया नहीं टूटी | उसने गट्ठर शिवसहाय को दे दिया | उसने भी जोर लगाया, पर तोड़ नहीं सका | सब लड़कों ने बारी-बारी से गट्ठर लिया और जोर लगाया ; किंतु कोई उसे तोड़ने में सफल नहीं हुआ |

मातादीन ने गट्ठर खोलकर एक-एक टहनी सब लड़कों को दे दी | इस बार सभी ने टहनियों को फटाफट तोड़ दिया | अब मातादीन बोला – ” देखो यह टहनियां जब तक एक साथ थी | तुममें से कोई उन्हें तोड़ नहीं सका | और जब ये अलग-अलग हो गई तो तुमने सरलता से सब को तोड़ डाला | इसी प्रकार यदि तुम लोग आपस में झगड़ते और अलग रहोगे तो, दूसरे लोग तुम लोगों को तंग करेंगे और दबा लेंगे | लेकिन यदि तुम लोग परस्पर मेल से रहोगे तो तुम से कोई शत्रुता करने का साहस नहीं करेगा |


मातादीन के लड़कों ने उसी दिन से आपस में झगड़ना छोड़ दिया | वे मेल से रहने लगे |”






6. वैद्यजी भगाये गये


देवसहाय का लड़का भगवतीप्रसाद बीमार हो गया था | वह गर्मी की दोपहर में घर से चुपचाप आम चुनने भाग गया और वहां उसे लू लग गयी | उसे जोर से बुख़ार चढ़ा था | देवसहाय ने वैद्य जी को अपने लड़के की चिकित्सा के लिए बुलाया |

वैद्य जी ने आकर लड़के की नाड़ी देखी और कहा – ” इसे लू लगी है | यह बड़ा चंचल जान पड़ता है | दोपहरी में घर से बाहर जाने का क्या काम था | यह बहुत बुरी बात है | जो लड़के अपने बड़ों की बात नहीं मानते | वह ऐसे ही दु:ख भोगते हैं |”

वैद्य जी उपदेश देते जाते थे और लड़कों को डांटते जाते थे | देवसहाय को यह बात अच्छी नहीं लगी | उन्होंने कहा – ” वैद्य जी मैंने आप को बुलाकर भूल कि आप अपनी फीस लीजिए और जाइए | मैं अपने लड़के की चिकित्सा किसी अन्य वैद्य से करा लूंगा | आप तो बीमार लड़के को डांटकर और दु:खी कर रहे हैं |”

वैध जी बेचारे लज्जित होकर चले गए |

कहानी की शिक्षा: ” जो दु:ख में पड़ा है, उससे उस समय उसकी भूले बताकर और उपदेश देकरअधिक दु:खी नहीं करना चाहिए | उस समय तो उससे सहानुभूति दिखाना और उसकी सेवा करना ही उचित है |””






7. बुरे कर्म का बुरा नतीजा


एक गरीब किसान के पास एक छोटा सा खेत और एक बैल था। बड़ी मेहनत से उसने कुछ पैसे जमा किये और एक बैल और खरीदा। जब वो बैल खरीद कर ला रहा था तो रास्ते में उसे चार युवक मिले। उन युवकों ने किसान से कहा क्या तुम इस बैल को बेचोगे। किसान ने सोचा मैंने यह बैल 1500 रुपए में खरीदा है। यदि इससे अधिक पैसे मिलते हैं तो मैं इसे बेच दूंगा और इससे बेहतर बैल खरीद लूंगा।


उस किसान ने उन लड़कों को बैल की कीमत 2000 रुपए बताई। लड़के बोले कीमत तो ज्यादा है क्यों न किसी समझदार व्यक्ति को पंच बनाकर फैसला करा लें। आप और हम यह वचन लेंगे की जो भी कीमत पंच कहेंगे वो हम मान लेंगे। कुछ सोच कर किसान ने बैल बेचने का वचन दे दिया। थोड़ी देर बाद वहां से एक वृद्ध व्यक्ति गुजरे। सभी न उन्हें ही पंच बनाने का फैसला किया। किसान ने भी सहमति दे दी। वास्तव में वह चारों लड़के एक ठग पिता की संतान थे और वो वृद्ध कोई और नहीं बल्कि उन चरों का पिता ही था। उन्होंने पिता को ही पंच बना लिया।


पिता ने बैल की कीमत मात्र 500 रुपए तय की। वचन में बंधे किसाओं को 500 रूपये में बैल बेचना पड़ा। लेकिन वो इस बात को समझ गया कि मुझे ठगा जा रहा है। अगले दिन किसान एक सुंदर महिला के भेष में उन चारों भाइयों से मिला और उनमे से किसी एक के साथ शादी करने की इच्छा व्यक्त की। चारों तैयार हो गए और एक दूसरे से बहस करने लगे की मैं शादी करूँगा – मैं शादी करूँगा। नारी के भेष में किसान बोला जो मेरे लिए बनारसी साड़ी, मथुरा के पेड़े और सहारनपुर के आम सबसे पहले लाएगा मैं उसी के साथ शादी करूंगी। यह सुन चारों शहर की ओर दौड़े। उनके जाने के बाद किसान ने उस ठग पिता को बहुत पीटा और वहां से चला गया। जब ठक के चारों बेटे वापस आये और अपने पिता को इस स्थिति में देखा तो मन कसौटते रह गए वो कुछ नहीं कर सकते थे क्योंकि किसान का पता तो वह जानते ही नहीं थे।


अगले दिन वह किसान एक वैध का भेष बनाकर उस वृद्ध ठग का इलाज करने पंहुचा। और लड़कों को चार जड़ी बूटी लाने के लिए अलग अलग भेजा। लड़कों के जाने के बाद उस किसान ने उस वृद्ध को फिर पीटा और अपना बैल लेकर चला गया। जब चारों भाई लोटे तो पिता और और बद्तर अवस्ता में पाया। अब उन्होंने प्रण ले लिए की कभी किसी के साथ ठगी नहीं करेंगे। इस तरह एक मामूली किसान ने अपनी समझदारी से ठगों को सुधर दिया।





8. सूरदास


सूरदास भगवान कृष्ण के सबसे बड़े भक्तों में से एक थे। वह कृष्ण से इतना प्यार करते थे कि उन्होंने उनके सम्मान में एक लाख से अधिक भक्ति गीत लिखे।


कहानी के अनुसार सूरदास एक अंधे व्यक्ति थे, जिन्होंने एक बार राधा का पीछा करते हुए उसकी पायल छीन ली थी।


जब उसे वापस करने के लिए कहा गया, तो उसने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह उसकी पहचान की पुष्टि नहीं कर सकता क्योंकि वह अंधा था।


इस बिंदु पर, कृष्ण ने उन्हें दृष्टि का आशीर्वाद दिया, जिसके बाद सूरदास ने कृष्ण से उनकी दृष्टि फिर से लेने की भीख मांगी। जब पूछा गया कि क्यों, उन्होंने कहा कि उन्होंने कृष्ण को देखा था, और और कुछ नहीं था जो वह फिर से देखना चाहते थे।


यह कहानी आपके बच्चे को बिना शर्त प्यार करना सिखाएगी और उन चीजों के प्रति समर्पण प्रदर्शित करेगी जो उसकी परवाह करती है।






9. अर्जुन



जब पांडव छोटे थे, तो उन्होंने युद्ध के मास्टर द्रोण के अधीन प्रशिक्षण लिया। द्रोण अपने शिष्यों का परीक्षण करना चाहते थे,


इसलिए उन्होंने एक खिलौना पक्षी को एक पेड़ में चिपका दिया और उन सभी को अपने धनुष को अपनी आंखों पर लगाने के लिए कहा। जब उसने उनसे पूछा कि वे क्या देख सकते हैं,


तो पांडवों ने अलग-अलग उत्तर दिए, जैसे पक्षी, पत्ते, पेड़, इत्यादि, और चूक गए। केवल अर्जुन ने, बिना एक ताल गंवाए, कहा कि वह पक्षी की आंख से ज्यादा कुछ नहीं देख सकता।


प्रसन्न होकर द्रोण ने अर्जुन को तीर मारने के लिए कहा। अर्जुन के बाण ने चिड़िया की आंख में पूरी तरह से छेद कर दिया


यह फोकस और दृढ़ संकल्प के बारे में एक कहानी है, जो आपके बच्चों को दिखाएगा कि वे क्या चाहते हैं और इसके लिए काम करने से उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।






10. सीता की शक्ति


राम और सीता के अयोध्या लौटने के बाद, उन्हें राजा और रानी का ताज पहनाया गया, और एक समृद्ध शासन शुरू किया।


हालाँकि, सीता के बारे में अफवाहें फैलने लगीं, जो एक अन्य पुरुष रावण के साथ रहती थी (भले ही यह उसकी इच्छा के विरुद्ध था)।


इन अफवाहों को नियंत्रित करने और अपनी प्रजा के निरंतर विश्वास को सुनिश्चित करने के लिए, राम ने सीता को वन में निर्वासित कर दिया, जहाँ वह वाल्मीकि के साथ रहीं। यहाँ, उसने जुड़वाँ लड़कों को जन्म दिया और उन्हें अकेले माँ के रूप में पाला।


यह फोकस और दृढ़ संकल्प के बारे में एक कहानी है, जो आपके बच्चों को दिखाएगा कि वे क्या चाहते हैं और इसके लिए काम करने से उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।


यह कहानी बताती है कि सुई की विपरीत परिस्थितियों में भी महिलाएं कैसे मजबूत, बहादुर और स्वतंत्र हो सकती हैं।






11. श्रावण की वफादारी


श्रवण एक गरीब किशोर लड़का था। भारत के सभी धार्मिक स्थलों की तीर्थ यात्रा पर अपने माता-पिता की मदद करना।


जब वे बूढ़े और अंधे थे, वह उन्हें अपने कंधों पर ढँकी दो टोकरियों में ले जा रहा था। अयोध्या के जंगलों को पार करते समय, श्रवण राजकुमार दशरथ द्वारा चलाए गए एक तीर से मारा जाता है,


और मर जाता है। अपनी मरती हुई सांस के साथ भी, वह दशरथ से अपने प्यासे माता-पिता के लिए पानी ले जाने के लिए कहता है।


श्रवण दया और वफादारी का अवतार।


यह कहानी आपके बच्चों को करुणा और माता-पिता की देखभाल करने के गुणों को समझने में मदद करेगी।






12. मंदोदरी का धैर्य



मंदोदरी रावण की पत्नी थी। जब उसने क्रूरता की, तो उसने उसे न्यायपूर्ण और सम्मानजनक होने के लिए मनाने की पूरी कोशिश करते हुए अपना दिन बिताया।


उसने उसे सीता को मुक्त करने के लिए भी कहा, हालांकि उसकी सलाह बहरे कानों पर पड़ी। अंत तक, वह अपने पति के प्रति वफादार रही।


श्रवण दया और वफादारी का अवतार। यह कहानी आपके बच्चों को करुणा और माता-पिता की देखभाल करने के गुणों को समझने में मदद करेगी।


यह पाठ आपके बच्चों को अपने प्रियजनों के साथ धैर्य रखना सिखाता है, भले ही वे गलतियाँ कर रहे हों, बिना उन्हें छोड़े। किसी को प्यार करने का मतलब है उसका समर्थन करना, भले ही उसके कार्यों का समर्थन न क





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